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India Retail Inflation 5.5%: Khane-Peene, Fuel Aur Gold-Silver Ne Badhaya Mehngai Ka Dabav

 

सितंबर में खुदरा महंगाई 5.5% पर पहुंची, करीब दो साल का उच्च स्तर

भारत में महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.5% पर पहुंच गई, जो अक्टूबर 2024 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। सोमवार, 12 अक्टूबर को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों, ईंधन और कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को ऊपर धकेला। अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.8% थी।

यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) महंगाई को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहा है। केंद्रीय बैंक की निर्धारित ऊपरी सहनशीलता सीमा 6% है। सितंबर की दर इस सीमा से नीचे जरूर है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों ने आने वाले महीनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

खाने-पीने की चीजों की महंगाई में तेज उछाल

सितंबर में खाद्य और पेय पदार्थों की महंगाई दर बढ़कर 7.4% हो गई, जबकि अगस्त में यह 5.7% थी। उपलब्ध नई CPI सीरीज के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 के बाद की अवधि में खाद्य महंगाई का यह सबसे ऊंचा स्तर है।

खाद्य कीमतों में तेजी का असर सीधे आम परिवारों के बजट पर पड़ता है। रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ने से लोगों की बचत प्रभावित हो सकती है। कम और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए इसका असर ज्यादा महसूस किया जा सकता है, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा खाने-पीने और जरूरी सेवाओं पर खर्च होता है।

कमजोर मानसून भी चिंता बढ़ा रहा है। बारिश के अपेक्षाकृत खराब रहने और जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा नहीं होने से रबी फसलों की बुवाई पर असर पड़ने की आशंका है। अगर कृषि उत्पादन प्रभावित होता है, तो आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

ईंधन और परिवहन लागत ने बढ़ाई परेशानी

परिवहन क्षेत्र में महंगाई सितंबर में 5% दर्ज की गई। इस श्रेणी में लगातार पांच महीनों से बढ़ोतरी देखी जा रही है। परिवहन लागत बढ़ने का असर केवल यात्रा तक सीमित नहीं रहता। माल ढुलाई महंगी होने पर कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है, जिसका बोझ आखिरकार ग्राहकों तक पहुंचता है।

खाने-पीने की चीजों और परिवहन लागत में बढ़ोतरी का असर रेस्तरां और आवास सेवाओं पर भी दिखाई दिया। इस श्रेणी की महंगाई सितंबर में बढ़कर 9.4% हो गई। यह लगातार सातवां महीना था, जब इस क्षेत्र में महंगाई की दर बढ़ी।

इसका मतलब है कि बाहर खाना खाने, होटल में ठहरने और संबंधित सेवाओं का खर्च भी बढ़ सकता है। कारोबारियों के लिए लागत और ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सोने-चांदी की कीमतों का भी असर

सितंबर में व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और विविध वस्तुओं एवं सेवाओं की श्रेणी में महंगाई दर 13.75% रही। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों की अवधि में यह इस श्रेणी का सबसे निचला स्तर था, फिर भी महंगाई काफी ऊंची बनी हुई है।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक, व्यक्तिगत देखभाल से जुड़ी श्रेणी में महंगाई का एक बड़ा कारण सोने और चांदी की कीमतें हैं। इनकी कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रभाव पड़ता है।

इसके अलावा, टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं, एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी कीमतें बढ़ाने की घोषणा की है। अगर ये बढ़ोतरी खुदरा कीमतों में शामिल होती है, तो आने वाले महीनों में CPI पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

RBI के सामने ब्याज दरों को लेकर चुनौती

महंगाई में ताजा उछाल ने RBI की मौद्रिक नीति को लेकर बहस तेज कर दी है। अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार, सितंबर में खुदरा महंगाई का अनुमान से अधिक बढ़कर 5.5% तक पहुंचना और अक्टूबर में इसके 6% पार जाने की आशंका हालिया नीतिगत सख्ती को सही ठहरा सकती है।

नायर ने कमजोर मानसून, जलाशयों में पानी की कमी और रबी की बुवाई से जुड़े जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके आकलन के मुताबिक, अगर महंगाई का दबाव बना रहता है, तो दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना मजबूत हो सकती है।

हालांकि, आगे की नीति का फैसला केवल एक महीने के आंकड़ों पर निर्भर नहीं करेगा। कच्चे तेल की कीमतों का रुख, खाद्य आपूर्ति, मानसून के बाद की स्थिति और अगले CPI आंकड़े भी अहम होंगे। वर्ष 2027 में ब्याज दरों को लेकर RBI का रुख इन परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है।

आम लोगों और कारोबार पर क्या होगा असर?

महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहने पर घरेलू बजट से लेकर कारोबारी निवेश तक कई क्षेत्रों पर दबाव पड़ सकता है। जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से उपभोक्ताओं के पास गैर-जरूरी खर्च के लिए कम पैसा बचता है। वहीं, यदि RBI महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाता है, तो कर्ज की लागत भी बढ़ सकती है।

फिलहाल सितंबर के आंकड़े एक चेतावनी जरूर देते हैं, लेकिन आने वाले महीनों में महंगाई किस दिशा में जाएगी, यह खाद्य कीमतों, कच्चे तेल और कंपनियों की मूल्य निर्धारण रणनीति पर निर्भर करेगा। RBI के लिए चुनौती साफ है: कीमतों को नियंत्रण में रखना, बिना आर्थिक गतिविधियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाले।

SRA
Ajay Kumar
Founder & Chief Editor • Story Real A

Investigative journalist and founder of Story Real A, focusing on public policy, national socioeconomic developments, governance, and grassroots reporting across India.

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